नियत नेलनार के विकास फंड पर उठे सवाल, रायनार ग्राम सभा में सड़क-पुलिया की बदहाली पर ग्रामीणों का आक्रोश रेंगाबेड़ा से नूलवट्टी तक पगडंडी के सहारे आवागमन, बरसात में बढ़ती है परेशानी;
नारायणपुर ओरछा रायनार। अबूझमाड़ क्षेत्र में बुनियादी सुविधाओं की स्थिति को लेकर ग्रामीणों की नाराजगी एक बार फिर सामने आई है। ग्राम पंचायत रायनार में आयोजित ग्राम सभा के दौरान ग्रामीणों ने सड़क, पुलिया, पगडंडी मार्ग, पेयजल और शिक्षा से जुड़ी समस्याओं को जिला पंचायत सदस्य राकेश उसेंडी के सामने रखा। ग्रामीणों ने कहा कि वर्षों से समस्याओं के समाधान की मांग की जा रही है, लेकिन दूरस्थ गांवों में आज भी आवागमन के लिए पगडंडियों का सहारा लेना पड़ रहा ग्रामीणों का कहना है कि बरसात के मौसम में नदी-नालों के कारण रास्ते और अधिक जोखिम भरे हो जाते हैं। इसका असर स्कूली बच्चों, शिक्षकों, राशन परिवहन करने वाले लोगों और आम ग्रामीणों के दैनिक जीवन पर पड़ता है। ग्रामीणों ने मांग की कि इन समस्याओं को प्राथमिकता से लेते हुए स्थायी समाधान किया जाए।
विकास के लिए आने वाली राशि का लाभ गांवों तक कब पहुंचेगा?
ग्राम सभा में नियत नेलनार के अंतर्गत क्षेत्र के विकास के लिए संचालित योजनाओं और उपलब्ध कराई जाने वाली निधियों के उपयोग को लेकर भी सवाल उठाए गए। ग्रामीणों ने कहा कि अबूझमाड़ के विकास के लिए विभिन्न योजनाओं के माध्यम से राशि स्वीकृत होने के बावजूद कई गांवों में सड़क, पुल-पुलिया, स्कूल भवन और पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी बनी हुई है।
ग्रामीणों ने मांग की कि विकास कार्यों के लिए स्वीकृत राशि, उसकी उपयोगिता और निर्माण कार्यों की स्थिति की जानकारी सार्वजनिक की जाए। साथ ही, जिन गांवों में मूलभूत सुविधाओं का अभाव है, वहां जरूरत के अनुसार प्राथमिकता तय कर निर्माण कार्य शुरू किए जाएं।
ग्रामीणों का सवाल है कि विकास योजनाओं का वास्तविक लाभ दूरस्थ गांवों तक कब पहुंचेगा और लोगों को बुनियादी सुविधाओं के लिए कब तक इंतजार करना पड़ेगा?
रेंगाबेड़ा, पुराना पारा और नूलवट्टी में रास्तों की समस्या
ग्राम सभा में ग्रामीणों ने अलग-अलग मार्गों की समस्याएं सामने रखते हुए निर्माण कार्यों की मांग की।
रेंगाबेड़ा: ग्राम पंचायत रायनार के आश्रित ग्राम रेंगाबेड़ा में आज भी पगडंडी के सहारे आवागमन करना पड़ता है। ग्रामीणों ने पुराना पारा मार्ग पर भी पगडंडी के स्थान पर बेहतर रास्ता बनाने और लगभग 80 मीटर लंबी पुलिया की आवश्यकता बताई।
नूलवट्टी मार्ग: ग्रामीणों के अनुसार, इस मार्ग पर लगभग 100 मीटर तक पगडंडी होने के कारण लोगों को आवागमन में परेशानी होती है। इसका असर विद्यार्थियों, शिक्षकों और राशन के परिवहन पर भी पड़ता है।
टेकानार गप्पापारा से डोंगरीपारा: इस क्षेत्र में भी पक्के रास्ते और पुलिया की जरूरत उठाई गई। ग्रामीणों ने बताया कि मार्ग की समस्या के समाधान के लिए लगभग 100 मीटर लंबी पुलिया की आवश्यकता है, जबकि संबंधित मार्ग के एक हिस्से को लगभग 120 मीटर तक का बताया गया। बरसात में यहां से गुजरना और कठिन हो जाता है।
ग्रामीणों ने मांग की कि संबंधित स्थलों का तकनीकी निरीक्षण कराकर जरूरत के अनुसार सड़क और पुलिया निर्माण की स्वीकृति दी जाए।
धनोरा-पेरमापाल में ग्रामीणों ने खुद तैयार की पगडंडी
जिला पंचायत सदस्य राकेश उसेंडी ने ग्राम पंचायत धनोरा-पेरमापाल में निरीक्षण के दौरान सामने आई स्थिति का भी उल्लेख किया। उनके अनुसार, वहां ग्रामीणों ने स्वयं रास्ता काटकर पगडंडी तैयार की है, ताकि गांव तक पहुंचने के लिए आवागमन का रास्ता बनाया जा सके।
इस स्थिति का वीडियो भी सामने लाने की बात कही गई है, ताकि दूरस्थ क्षेत्रों में आवागमन की वास्तविक कठिनाइयों को संबंधित अधिकारियों और शासन-प्रशासन के सामने रखा जा सके।
ग्रामीणों का कहना है कि गांव तक पहुंचने के लिए लोगों को खुद रास्ता तैयार करना पड़े, तो यह समस्या के स्थायी समाधान की आवश्यकता को दर्शाता है। ऐसे क्षेत्रों में सड़क और पुलिया निर्माण के लिए ठोस पहल जरूरी है।
ग्रामीणों की चेतावनी—हादसे से पहले हो समाधान
ग्रामीणों ने नदी-नालों और खराब रास्तों के कारण बरसात के दौरान बच्चों एवं आम लोगों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई। उनका कहना है कि रास्ते और पुलिया नहीं होने से किसी भी समय दुर्घटना की आशंका बनी रहती है।
ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन से मांग की कि किसी अप्रिय घटना का इंतजार किए बिना संवेदनशील स्थानों का निरीक्षण कराया जाए और आवश्यकतानुसार पुलिया तथा सड़क निर्माण की कार्रवाई की जाए।
राकेश उसेंडी बोले—जनता की समस्याओं को शासन तक पहुंचाएंगे
ग्रामीणों की समस्याएं सुनने के बाद जिला पंचायत सदस्य राकेश उसेंडी ने कहा कि जनप्रतिनिधि के रूप में जनता की समस्याओं को उठाना उनकी जिम्मेदारी है। उन्होंने रायनार, रेंगाबेड़ा, पुराना पारा, नूलवट्टी, टेकानार गप्पापारा, डोंगरीपारा और धनोरा-पेरमापाल सहित दूरस्थ गांवों की सड़क, पुलिया, पेयजल और शिक्षा से जुड़ी समस्याओं को शासन-प्रशासन के सामने मजबूती से रखने की बात कही।
उन्होंने कहा, “जनता की समस्या मेरी समस्या है। लोगों को केवल आश्वासन नहीं, बल्कि जमीन पर विकास कार्य चाहिए। नियत नेलनार क्षेत्र के लिए आने वाली विकास राशि का लाभ वास्तविक रूप से गांवों तक पहुंचना चाहिए। योजनाओं की राशि का उपयोग कहां और किस काम में हो रहा है, इसकी जानकारी जनता के सामने होनी चाहिए।”
राकेश उसेंडी ने कहा कि यदि लगातार मांग के बाद भी समस्याओं पर ध्यान नहीं दिया गया, तो जनहित में लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन की दिशा में कदम उठाया जाएगा।
ग्रामीणों को उम्मीद—अब धरातल पर दिखेगा विकास
ग्राम सभा में ग्रामीणों ने उम्मीद जताई कि उनकी वर्षों पुरानी समस्याओं का समाधान करने के लिए संबंधित विभाग ठोस कदम उठाएंगे। ग्रामीणों के अनुसार, सड़क और पुलिया बनने से बच्चों को स्कूल पहुंचने, राशन लाने-ले जाने, स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंचने और दैनिक आवागमन में बड़ी राहत मिल सकती है।
अबूझमाड़ जैसे दुर्गम क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं का विस्तार ग्रामीणों के जीवन में महत्वपूर्ण बदलाव ला सकता है। इसके लिए योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन, निर्माण कार्यों की प्राथमिकता और उनकी नियमित निगरानी जरूरी है।
ग्रामीणों की मांग स्पष्ट है—पगडंडियों की जगह पक्की सड़कें बनें, जोखिम भरे नदी-नालों पर पुलिया का निर्माण हो और नियत नेलनार के विकास के लिए आने वाली राशि का लाभ दूरस्थ गांवों तक पहुंचे। अब देखना होगा कि इन मांगों पर संबंधित विभाग कब तक ठोस कार्रवाई करते हैं।





