अबूझमाड़ के मलमेटा गांव का मामला, पंचायत सचिव के चक्कर काटने को मजबूर ग्रामीण; जिला प्रशासन से लगाई न्याय की गुहार
नारायणपुर। जिले के ओरछा विकासखंड के दुर्गम अबूझमाड़ क्षेत्र से एक ऐसा मामला सामने आया है, जो ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्यों के भुगतान और जिम्मेदारों की जवाबदेही पर सवाल खड़े करता है। ग्राम पंचायत आदनार के आश्रित ग्राम मलमेटा निवासी एक ग्रामीण अपनी मेहनत की मजदूरी पाने के लिए पिछले तीन वर्षों से भटकने को मजबूर है। तालाब निर्माण एवं खुदाई कार्य में मेहनत करने के बावजूद उसे आज तक करीब 30 हजार रुपये की बकाया राशि नहीं मिल पाई है।
मलमेटा निवासी ग्रामीण माशा राम कातुवो का आरोप है कि उसने तालाब निर्माण से संबंधित कार्य में मजदूरी की थी, लेकिन काम पूरा होने के बाद भी उसे मेहनताना नहीं दिया गया। ग्रामीण के मुताबिक, उसकी लगभग 30 हजार रुपये की राशि अब तक बकाया है। इस राशि को प्राप्त करने के लिए वह बीते तीन वर्षों से लगातार ग्राम पंचायत के चक्कर काट रहा है।
ग्रामीण ने पंचायत सचिव मनकू पोड़ियाम पर आरोप लगाया है कि जब भी वह अपनी बकाया मजदूरी की मांग लेकर उनके पास पहुंचता है, तो उसे भुगतान का आश्वासन देकर वापस भेज दिया जाता है। इस तरह तीन साल का लंबा समय बीत गया, लेकिन आज तक उसे उसकी मेहनत की कमाई नहीं मिल सकी है।
तीन साल से मिल रहा आश्वासन, लेकिन भुगतान अब तक नहीं

ग्रामीण का कहना है कि मजदूरी की राशि उसके लिए काफी मायने रखती है। एक गरीब परिवार के लिए 30 हजार रुपये छोटी रकम नहीं होती। इस राशि को पाने के लिए बार-बार पंचायत कार्यालय और जिम्मेदारों के पास जाना पड़ रहा है। इसके बावजूद समस्या का समाधान नहीं होने से वह काफी परेशान है।
आखिरकार लगातार इंतजार और चक्कर काटने से परेशान होकर माशा राम कातुवो ने मीडिया के सामने अपनी पीड़ा जाहिर की और जिला प्रशासन से बकाया मजदूरी दिलाने की मांग की है।
पंचायत व्यवस्था और जिम्मेदारों की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
इस पूरे मामले ने ग्राम पंचायत स्तर पर होने वाले निर्माण कार्यों, मजदूरी भुगतान और प्रशासनिक निगरानी की व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि ग्रामीण ने वास्तव में तालाब निर्माण कार्य में मजदूरी की है और उसकी राशि तीन वर्षों से लंबित है, तो अब तक भुगतान क्यों नहीं किया गया? आखिर किस स्तर पर भुगतान अटका हुआ है? क्या संबंधित कार्य का मस्टर रोल, भुगतान रिकॉर्ड और अन्य दस्तावेजों की जांच हुई है?
ग्रामीण द्वारा पंचायत सचिव पर लगाए गए आरोपों की निष्पक्ष जांच होना आवश्यक है, ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके और यदि किसी स्तर पर लापरवाही या अनियमितता हुई है तो संबंधित जिम्मेदारों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा सके।
अब प्रशासन से न्याय की उम्मीद
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि अबूझमाड़ के दूरस्थ गांव मलमेटा के एक ग्रामीण को अपनी मेहनत की कमाई पाने के लिए तीन साल तक भटकना क्यों पड़ रहा है? क्या जिम्मेदार अधिकारियों को इस मामले की जानकारी नहीं है, या फिर शिकायत के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई?
ग्रामीण ने जिला प्रशासन से मांग की है कि पूरे मामले की जांच कराई जाए, तालाब निर्माण कार्य से संबंधित दस्तावेजों और भुगतान रिकॉर्ड की पड़ताल की जाए तथा उसकी बकाया करीब 30 हजार रुपये की राशि जल्द दिलाई जाए।
अब देखना होगा कि जिला प्रशासन इस मामले को कितनी गंभीरता से लेता है और तीन साल से अपनी मजदूरी के लिए इंतजार कर रहे ग्रामीण को आखिर कब न्याय मिल पाता है।





