नारायणपुर। 81 दिन बाद भी कार्रवाई नहीं! कोहकामेटा थाने में शिकायत के बावजूद न्याय का इंतजार, आखिर पुलिस क्यों है मौन? मुरनार में 16.40 लाख के नवीन शाला भवन निर्माण पर गंभीर सवाल! ठेकेदार तोमेश्वर सिंह मंडावी पर आरोप, एक साल से ग्रामीणों को घुमा रहा ठेकेदार, सरपंच का नंबर भी ब्लॉक!
जिले की ग्राम पंचायत मुरनार में नवीन शाला भवन निर्माण कार्य को लेकर गंभीर शिकायत सामने आई है। निर्माण कार्य में कथित अनियमितता और शासकीय राशि के उपयोग को लेकर ग्रामीणों ने थाना प्रभारी कोहकामेटा के समक्ष लिखित शिकायत सौंपकर जांच एवं कार्रवाई की मांग की है। शिकायत में ठेकेदार तोमेश्वर सिंह मंडावी का नाम सामने आया है।

शिकायत पत्र के अनुसार, ग्राम पंचायत मुरनार में नवीन शाला भवन निर्माण कार्य के लिए लगभग 16 लाख 40 हजार रुपये की प्रशासनिक एवं तकनीकी स्वीकृति प्रदान की गई थी। लेकिन ग्रामीणों का आरोप है कि स्वीकृत राशि के अनुरूप धरातल पर निर्माण कार्य नहीं हुआ है।
एक साल से आज बनाऊंगा, कल बनाऊंगा कहकर घुमा रहा ठेकेदार!

ग्रामीणों का आरोप है कि ठेकेदार तोमेश्वर सिंह मंडावी पिछले करीब एक साल से आज काम शुरू करवाऊंगा, कल निर्माण पूरा करवाऊंगा कहकर लोगों को लगातार आश्वासन दे रहा है। लेकिन निर्माण कार्य को लेकर अब तक स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाई है।
सरपंच का नंबर भी ब्लॉक, फोन लगाने पर नहीं उठाता कॉल!
ग्रामीणों का दावा है कि ठेकेदार ने सरपंच का मोबाइल नंबर ब्लॉक कर रखा है। फोन लगाने पर भी ठेकेदार कॉल नहीं उठाता और निर्माण कार्य को लेकर कोई संतोषजनक जवाब नहीं देता।
81 दिन बाद भी पुलिस कार्रवाई पर सवाल!
11 अगस्त 2026 को कोहकामेटा पुलिस थाने में शिकायत दिए जाने के बाद 31 अक्टूबर 2026 तक करीब 81 दिन बीत चुके हैं। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि अब तक उन्हें जांच और कार्रवाई की स्थिति की स्पष्ट जानकारी नहीं मिली है। आखिर पुलिस ने अब तक क्या कार्रवाई की? क्या संबंधित लोगों से पूछताछ हुई? इन सवालों का जवाब ग्रामीण मांग रहे हैं।
अन्य पंचायतों से भी शिकायतें, जल्द होगा बड़ा खुलासा!
ठेकेदार के कार्यों को लेकर अन्य ग्राम पंचायतों से भी शिकायतें मिलने की जानकारी सामने आ रही है। सी जी वार्ता इन शिकायतों और दस्तावेजों की पड़ताल कर रहा है।
16.40 लाख रुपये का हिसाब कौन देगा?
शिकायतकर्ताओं ने आवेदन में लगभग 2 लाख रुपये चेक के माध्यम से तथा 6 लाख 56 हजार रुपये सरपंच के माध्यम से दिए जाने का उल्लेख किया है। साथ ही मजदूरों के भुगतान, बिल और निर्माण कार्य के खर्च को लेकर सवाल उठाए गए हैं।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि स्वीकृत राशि, भुगतान विवरण, बिल-वाउचर, माप पुस्तिका (एमबी) और मौके पर हुए निर्माण कार्य का भौतिक सत्यापन कराया जाए। अनियमितता प्रमाणित होने पर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।
सबसे बड़ा सवाल: 16 लाख 40 हजार रुपये की स्वीकृति के बाद नवीन शाला भवन की वास्तविक स्थिति क्या है? सरकारी राशि का हिसाब कौन देगा? और 81 दिन से लंबित शिकायत पर पुलिस कार्रवाई कब होगी?





