नारायणपुर। आम आदमी पार्टी छत्तीसगढ़ के प्रदेश प्रवक्ता एवं अध्यक्ष बस्तर लोकसभा नरेन्द्र नाग ने छत्तीसगढ़ राज्य के 26वें स्थापना दिवस पर प्रदेशवासियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य का निर्माण यहां के लोगों के संघर्ष, बलिदान और बेहतर भविष्य की उम्मीदों के साथ हुआ था। लेकिन 26 वर्ष बाद भी यह सवाल जनता के सामने खड़ा है कि आखिर अलग राज्य बनने के बाद बस्तर और सरगुजा के आदिवासी अंचलों को मिला क्या?
उन्होंने कहा कि भाजपा और कांग्रेस दोनों दलों को लंबे समय तक प्रदेश में शासन करने का अवसर मिला। लगभग 18 वर्ष भाजपा और 8 वर्ष कांग्रेस की सरकार रही, लेकिन आज भी प्रदेश का युवा रोजगार के लिए भटक रहा है, ग्रामीण जनता सड़क, बिजली, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रही है। आदिवासी समाज अपने जल, जंगल और जमीन की रक्षा के लिए आंदोलन करने को मजबूर है।
करोड़ों के राज्योत्सव से ज्यादा जरूरी जनता की बुनियादी जरूरतें
नरेन्द्र नाग ने कहा कि राज्य स्थापना दिवस आत्ममंथन का अवसर होना चाहिए, न कि सरकारी धन खर्च कर मंचों की चमक-दमक और प्रचार-प्रसार का माध्यम। जब सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी है, अस्पतालों में डॉक्टर और सुविधाएं नहीं हैं, युवा बेरोजगार हैं तथा गांवों में सड़क और बिजली की समस्या बनी हुई है, तब करोड़ों रुपये के भव्य आयोजनों पर खर्च करना सरकार की प्राथमिकताओं पर सवाल खड़ा करता है।
छत्तीसगढ़ की जनता को भव्य आयोजन नहीं, बल्कि धरातल पर विकास चाहिए। राज्योत्सव का वास्तविक उत्सव तब होगा, जब हर गांव में सड़क, बिजली, पानी, बेहतर शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध होंगी।
बस्तर-सरगुजा की खनिज संपदा चाहिए, लेकिन स्थानीय युवाओं को रोजगार क्यों नहीं?
उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की खनिज संपदा का बड़ा हिस्सा बस्तर और सरगुजा जैसे आदिवासी अंचलों से आता है। रावघाट, बैलाडीला, अमदई, कच्चे, दुर्गूकोंदल और अन्य खनन क्षेत्रों से देश की अर्थव्यवस्था को संसाधन मिलते हैं, लेकिन इन क्षेत्रों के स्थानीय युवाओं को रोजगार के लिए दूसरे राज्यों और शहरों में पलायन करना पड़ता है।
नारायणपुर जिले में खनिज संपदा और औद्योगिक परियोजनाओं के नाम पर विकास के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन स्थानीय बेरोजगारों के हिस्से में आखिर क्या आया? रावघाट परियोजना हो या अन्य खनन परियोजनाएं, स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता, कौशल प्रशिक्षण और स्थायी रोजगार सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
नरेन्द्र नाग ने कहा कि हमारी स्पष्ट मांग है कि खनन परियोजनाओं में सबसे पहले प्रभावित क्षेत्र और स्थानीय जिले के बेरोजगार युवाओं को रोजगार मिले। खनिज हमारा है तो रोजगार में पहला अधिकार भी स्थानीय लोगों का होना चाहिए।
जल, जंगल और जमीन पर आदिवासियों का अधिकार सर्वोपरि
उन्होंने कहा कि हसदेव अरण्य से लेकर बस्तर और अबूझमाड़ तक आदिवासी समाज की संस्कृति, परंपरा और आजीविका जंगलों से जुड़ी हुई है। विकास के नाम पर जंगलों का विनाश, पर्यावरण का नुकसान और आदिवासियों के अधिकारों की अनदेखी किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं की जा सकती।
पांचवीं अनुसूची, पेसा कानून और ग्रामसभा के संवैधानिक अधिकारों का सम्मान होना चाहिए। किसी भी परियोजना में प्रभावित ग्रामीणों और ग्रामसभाओं की वैधानिक भूमिका एवं अधिकारों की अनदेखी नहीं होनी चाहिए।
क्या विकास का अर्थ केवल खनन कंपनियों का मुनाफा है? सरकार को बताना चाहिए कि जिन लोगों की जमीन और जंगलों से प्रदेश को खनिज संपदा मिल रही है, उनके जीवन में खुशहाली क्यों नहीं आ रही?
बस्तर और सरगुजा में शिक्षा एवं स्वास्थ्य व्यवस्था की बदहाली
नरेन्द्र नाग ने कहा कि बस्तर और सरगुजा के अनेक ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा नहीं मिल पा रही है। कहीं स्कूलों में शिक्षकों की कमी है तो कहीं भवन, पेयजल, बिजली और अन्य बुनियादी सुविधाओं का अभाव है।
स्वास्थ्य व्यवस्था की स्थिति भी चिंताजनक है। ग्रामीण और दूरस्थ आदिवासी क्षेत्रों में अस्पतालों में डॉक्टर, दवाइयां, एंबुलेंस और आवश्यक चिकित्सा सुविधाओं की कमी के कारण मरीजों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। गर्भवती महिलाओं को समय पर अस्पताल पहुंचाने तक की व्यवस्था कई क्षेत्रों में चुनौती बनी हुई है।
नारायणपुर, ओरछा और अबूझमाड़ के दूरस्थ गांवों में आज भी बुनियादी सुविधाओं की जरूरत है। सरकार को इन क्षेत्रों के लिए विशेष कार्ययोजना बनाकर शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, बिजली और पेयजल की व्यवस्था सुनिश्चित करनी चाहिए।
रामगढ़ पर्वत, हसदेव अरण्य और बस्तर की प्राकृतिक धरोहरों की सुरक्षा जरूरी
उन्होंने कहा कि सरगुजा का रामगढ़ पर्वत और हसदेव अरण्य केवल प्राकृतिक संपदा नहीं, बल्कि हमारी ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और पर्यावरणीय विरासत हैं। इनकी सुरक्षा सरकार की जिम्मेदारी है। विकास के नाम पर प्राकृतिक धरोहरों को नुकसान पहुंचाना आने वाली पीढ़ियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है।
बस्तर की नदियां, पहाड़, जंगल और आदिवासी संस्कृति छत्तीसगढ़ की पहचान हैं। इनके संरक्षण के साथ ही स्थानीय समुदायों को विकास का वास्तविक भागीदार बनाया जाना चाहिए।
राज्य के 26 साल बाद भी युवा बेरोजगार, गांव बुनियादी सुविधाओं से वंचित
नरेन्द्र नाग ने कहा कि प्रदेश में सरकारी विभागों के रिक्त पदों पर समयबद्ध भर्ती नहीं हो रही है। निजी कंपनियों में भी स्थानीय युवाओं को पर्याप्त अवसर नहीं मिल रहे हैं। दूसरी तरफ हजारों युवा रोजगार की तलाश में प्रदेश से बाहर जाने को मजबूर हैं।
सरकार को बताना चाहिए कि प्रदेश की खनिज संपदा से होने वाली आय का लाभ स्थानीय जनता तक क्यों नहीं पहुंच रहा? ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली, पेयजल और सड़क जैसी सुविधाओं का अभाव क्यों बना हुआ है? आखिर कब तक आदिवासी अंचलों को विकास के नाम पर केवल आश्वासन मिलता रहेगा?
अब जनता को भाजपा-कांग्रेस के अलावा तीसरे विकल्प पर विचार करना होगा
अंत में नरेन्द्र नाग ने कहा कि छत्तीसगढ़ के 26 वर्ष पूरे होने पर हम प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं देते हैं, लेकिन जनता को अब यह भी सोचना होगा कि आखिर कब तक भाजपा और कांग्रेस की सत्ता की आंख-मिचौली में आम जनता पिसती रहेगी?
दोनों दलों को शासन करने के पर्याप्त अवसर मिले, लेकिन आज भी बेरोजगारी, भ्रष्टाचार, बदहाल शिक्षा-स्वास्थ्य व्यवस्था, ग्रामीण समस्याएं और आदिवासी अधिकारों की अनदेखी जैसे सवाल कायम हैं।
आम आदमी पार्टी छत्तीसगढ़ में एक मजबूत राजनीतिक विकल्प के रूप में जनता के बीच जाएगी। पार्टी संगठन को मजबूत करते हुए आगामी विधानसभा चुनाव में प्रदेश की सभी सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी करेगी।
हमारी राजनीति का केंद्र आम आदमी होगा। हमारी प्राथमिकता बेहतर सरकारी स्कूल, आधुनिक अस्पताल, युवाओं को रोजगार, किसानों को सम्मान, महिलाओं को सुरक्षा और आदिवासी समाज को उनके संवैधानिक अधिकार दिलाना है।
छत्तीसगढ़ को अब केवल राज्योत्सव की चमक-दमक नहीं, बल्कि जवाबदेह सरकार और वास्तविक विकास चाहिए।
बस्तर और सरगुजा को केवल खनिज संपदा के दोहन का केंद्र बनाकर मत रखिए। ये छत्तीसगढ़ की आत्मा, संस्कृति और पहचान हैं। यहां के लोगों को भी रोजगार, विकास, अधिकार और सम्मान में बराबर की भागीदारी मिलनी चाहिए।
नरेन्द्र नाग
प्रदेश प्रवक्ता व अध्यक्ष बस्तर लोकसभा
आम आदमी पार्टी, छत्तीसगढ़





